वीरेंद्र चौहान के अवॉर्ड पर सवाल
कुछ शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के दावों पर सवाल उठाए हैं, विशेषकर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) शिमला के प्रिंसिपल वीरेंद्र चौहान के चयन पर। गवर्नर को लिखे पत्र में दावा किया गया है कि वीरेंद्र चौहान का नाम 29 अगस्त 2025 को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए शिक्षकों की सूची में नहीं था।
इसके बावजूद उनका नाम बाद में टीचर अवार्ड वाली सूची में शामिल किया गया। 11 शिक्षकों द्वारा गवर्नर को लिखे पत्र में इसकी जांच की मांग की गई है।
चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं बरतने के आरोप
शिक्षकों ने राज्यपाल को भेजे पत्र में चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निर्धारित पात्रता और श्रेणीवार मानदंडों का समान रूप से पालन नहीं होने की बात कही है। उन्होंने पूरे चयन रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि उनकी आपत्ति किसी चयनित शिक्षक के खिलाफ नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया, पात्रता और निर्धारित मानदंडों के समान रूप से लागू होने को लेकर है।
दूसरे राज्य शिक्षक पुरस्कार पर भी सवाल
टीचरों ने यह भी आरोप लगाया है कि नियमों के अनुसार पहले राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त कर चुके शिक्षक को दोबारा यह पुरस्कार देने की पात्रता नहीं है। इसके बावजूद JBT सृष्टि शर्मा को दूसरी बार राज्य शिक्षक पुरस्कार दिए जाने का दावा किया गया है। शिक्षकों ने इस मामले में संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि यदि ऐसा हुआ है तो पात्रता की शर्त किस आधार पर लागू की गई।